हम भी देखेंगे कि कैसी है तेरी दुनिया, तेरी दुनिया भी क्या है
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन— दिल के खुश रखने को 'ग़ालिब' ये खयाल अच्छा है
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले, ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया — वरना हम भी आदमी थे काम के
ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे — इक आग का दरिया है और डूब के जाना है
उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़ — वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है